शनिवार, 26 सितंबर 2009
बिहार में कांग्रेस से क्यों डरने लगी पार्टियां
पटनाः मुख्यमंत्री nitish कुमार ने चुनाव परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा सावधानी हटी दुर्धटना घटी. यानि फिर से लालू का भय दिखाने का प्रयास प्रारम्भ. मुख्यमंत्री ने यह स्वीकार लिया है कि कांग्रेस ने उनको नुक्सान पहुंचाया है. और उनके आधार मतों में सेंधमारी करने में सफल रही है. मतलब साफ है. आगामी विधानसभ चुनाव में कांग्रेस राजग और राजद लोजपा दोनों के लिए परेषानी खड़ी करने वाली है! गत लोकसभा चुनाव के दौरान राजद-लोजपा ने अपने खराब प्रदर्षन के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया था इस बार राजग कांग्रेस पर यह आरोप लगा रहा है.आखिर माजरा क्या है. क्या सही में मृतप्राय कांग्रेस पुर्नजीवित हो गयी है या फिर नीतीष कुमार राज्य के उन मतदाताओं को कांग्रेस की ओर जाने से रोकना चाहते हैं जिन्हें राजद-लोजपा से परहेज है! चुनाव परिणामों को देखने से तो यही लगता है कि कांग्रेस ने पुर्नवापसी की है. जिन दो सीटों पर उसने जीत दर्ज करायी है वह सीट राजद और राजग के आधार वोट बैंक से जुड़ा हुआ है. इस लिए कांग्रेस की पुर्नवापसी राजद-लोजपा और राजग दोनों के लिए परेषानी पैदा करनेवाली है. यह बात अलग है कि चुनाव परिणाम से ज्यादातर राजग के उम्मीदवार ही प्रभावित हुए हैं पर सिमरीबख्तियारपुर और चेनारी विधानसभा क्षेत्र के आधार मतों को देखा जाए तो साफ लगेगा कि राजग और राजद के आधार मतों पर समान रूप से कांग्रेस ने सेंधमारी की है. सिमरीबख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम व यादव बहुल क्षेत्र होने के कारण वहां से महबूब अली कैसर की जीत राजद-लोजपा के लिए झटका है जबकि चेनारी में सवर्ण मतदाताओं के प्रभाव वाले इस सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज कर राजग को करारा झटका दिया है. इन अठारह सीटों में से एक भी सीट कांग्रेस की नहीं थी पर उसने दो सीटों पर जीत दर्ज कर सत्ताधारी दल भाजपा की बराबरी की है. इस उपचुनाव में भाजपा छह सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसने अपने दो उम्मीदवार जीताये जबकि जदयू बारह में से मात्र तीन सीट ही निकाल पायी. कांग्रेस ने दोनों सीटें जदयू से छीना है इसमें से सिमरीबख्तियारपुर की सीट कांग्रेस की परम्परागत सीट मानी जाती रही है. यहां से चैधरी सलाह उददीन लगातार जीतते रहे थे.अब उस सीट पर उनके पुत्र चैधरी महबूब अली कैसर चुनाव लड़ते हैं. गत विधानसभा चुनाव में वहां जदयू ने बाजी मारी थी. कांग्रेस की इस वापसी को दो नजरिये से देखा जा रहा है. पहला यह कि राजद-लोजपा से गत लोकसभा चुनाव के दौरान अलग हो चुनाव लड़ने और उपचुनाव में पुनः प्रयास के बावजूद राजद-लोजपा से समझौता नहीे कर कांग्रेस ने राज्य के उन मतदाताओं के लिए एक विकल्प खोल दिया है जो राजद और राजग दोनों की कार्यषैली से उब चुके थे. वैसे मतदाताओं ने नीतीष कुमार से मुक्ति के लिए कांगेस को अपना समर्थन दे दिया परिणामस्वरूप दो सीटों पर कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव जीत कर राज्य की अन्य राजनीतिक पार्टियों की चिन्ता बढ़ा दी है. कांग्रेस ने अठारह में दो कर परफार्म तब किया है जब उनके स्टार प्रचारक सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी इस उपचुनाव में प्रचार के लिए नहीं आये. यह परिणाम बिहार प्रभारी जगदीष टाईटलर,सी.पी.जोषी और सलमान खुर्षीद जैसे केन्द्रीय मंत्रियों के साथ साथ प्रदेष कांग्रेस अध्यक्ष अनिल षर्मा की मेहनत का फल माना जा रहा है. 2010 में विधानसभा का फाईनल होने वाला है जिसमें कांग्रेस पूरे दम खम केसाथ उतरने की तैयारी में जुट गयी है.बिहार प्रभारी जगदीष टाईटलर ने यह साफ कर दिया है कि कांग्रेस अब बिहार में अपने बूते चुनाव लड़ेगी किसी के साथ समझौता नहीं करेगी यही कारण है कि जदयू और राजद-लोजपा दोनों की बेचैनी बढ़ी हुई है.बात यह है कि कांगे्रस के अकेले चुनाव मैदान में उतरने से जहां राजद-लोजपा को अपने आधार वोट बैंक अल्पसंख्यक मतों के खिसकने का डर खाये जा रहा है तो राजग को सवर्ण मतदाताओं का कांग्रेस के साथ चले जाने की चिन्ता है.यही कारण है कि उपचुनाव के दौरान राजद-लोजपा और राजग नेताओं के निषाने पर कांग्रेस पार्टी रही और गठबंधनों के बड़े नेताओं ने कांग्रेस की कमजोरियों को जम कर जनता के बीच उछाला.
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