शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2009

हैण्ड पम्पों की मरम्मती के नाम पर डकार गये 91 लाख

पटना : ग्राम पंचायतों में हैण्ड पम्मों की मरम्मत एवं मरम्मत के साथ-साथ सफाई सुविधा के नाम पर 91.06 लाख रुपये की राशि का बंदरबांट किया गया. जिसके जांच के आदेश दिये गये हैं. मामला पीएचइडी मधेपुरा का है. यहां के कार्यपालक अभियंता पीएचइडी को 2001 से 2005 की अवधि में 12 प्रखण्डों के अंतर्गत 170 ग्राम पंचायतों को हैण्ड पंपों (एचपी) की स्थापना, साधारण मरम्मति, विशेष मरम्मति और सुलभ शौचालय को बनाने के लिए अग्रिम राशि के रूप में 91 लाख छह हजार रुपये उपलब्ध कराये गये. पंचायतों को मद बार खर्चों का विवरणी प्रत्येक अगले माह की 5 तारीख को और भौतिक और वित्तीय सफलताओं की मासिक व त्रैमासिक प्रगति प्रतिवेदन संबंधित कार्यपालक अभियंता को देना आवश्यक था साथ ही पंचायत द्वारा संधारित स्थल, लेखा बही संबंधित प्रमण्डलों द्वारा जांच किया जाना था पर ऐसा हुआ नहीं इसका खुलासा मार्च 2008 में जांच के दौरान हुआ डी.सी. विपत्र में न तो खर्च की विवरणी है और न ही 91.06 लाख रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र ही तीन से छह वर्ष बीतनेक के बाद भी प्रस्तुत किया गया. जून 2008 में इस संदर्भ में कैग ने मामले की उजागर किया. न तो कनीय अभियंता और न ही सहायक अभियंता ने स्थल लेखा पंजी को जांचा. इस संदर्भ में राज्य सरकार ने उपयोगिता प्रमाण पत्र की प्रस्तुति सुनिश्चित करने हेतु ठोस और प्रभावी कदमों को लेने के लिए उपविकास आयुक्त डीडीसी एवं अन्य क्षेत्रीय अधिकारियों को आवश्यक निर्देश निर्गत करने के लिए जिलाधिकारी मधेपुरा को लिखा बावजूद इनके उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं प्रस्तुत किया गया. परिणामस्वरूप राज्य सरकार ने 2005-06 के लिए निधि की स्वीकृति नहीं दी. जुलाई 2008 में कार्यपालक अभियंता पीएचइडी मधेपुरा ने जवाब दिया कि उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु संबंधित पंचायतों को लिखा गया है पर उनका जवाब प्राप्त नहीं हुआ है. इतने के अलावे, संबंधित पंचायत के मुखिया एवं पंचायत सेवकों के विरूद्घ कोई अनुशासनात्मक व दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई. साथ ही विभाग योजना निधि की राशि 91 लाख छह हजार रुपये की उपयोगिता सुनिश्चित करने में विफल रहा. स्थल लेखा का जे.ई. और ए.ई. द्वारा जांच के बिना यह सुनिश्चित नहीं किया जा सका कि काम वास्तव में पूरा किया गया है. कैग ने इस मामले को सरकार को प्रतिवेदित कर दिया है. पर पीएचइडी ने इस प्रकरण ने ठोस कार्रवायी नहीं की है.

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