शनिवार, 12 सितंबर 2009

राष्ट्रीय पोषण अभियान बिहार में फेल

पटनाः केन्द्र सरकार द्वारा राषि उपलब्ध कराये जाने के बावजूद राज्य सरकार के अधिकारियों की लेट लतीफी के कारण राषि खर्च नहीं हो पा रहा जिससे गरीब बच्चे सरकारी योजनाओं के लाभ से उपेक्षित हैं.अब पोषक सहायता राषि के आवंटन और व्यय को देखने से तो यही लगता है कि राज्य के अधिकारियों की लापरवाही के कारण केन्द्र द्वारा भेजे गये करोड़ो रुपये यूं ही पड़े रह गये पर गरीब किषोरियों को योजना का लाभ नहीं पहुंचाया जा सका. कैग ने राज्य सरकार के अधिकारियों की इस लापरवाही पर गहरा ऐतराज व्यक्त किया है. मामला औरंगावाद और गया जिले से जुड़ा है.राष्ट्रीय पोषाहार अभियान के अन्तर्गत किषोरी बालिकाओं के लिए पोषाहार योजना नाम से पायलट परियोजना राज्य के दो जिलों औरंगावाद और गया जिले में अगस्त 2002 में प्रारम्भ हुई. परियोजना के निर्देषानुसार गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों के किषोरी वालिकाओं और गर्भवती एवं षिषुवती माताओं को कुपोषण, सुक्ष्मपोषक की कमियों और पिछड़े जिलों जहां बालिकाओं और औरतों में कुपोषण थी में चिरकालिक उर्जा कमियों को कम करने के लिए प्रारंभिक रूप से तीन माह की अवधि के लिए 6 किलो अनाज प्रति लाभुकों को प्रति माह मुत दिया जाना था.लाभुक जो व्यवरूछेद वजन क्रमषः 35 और 40 किलो प्राप्त कर लिये तीन महीने के बाद अनाज नहीं प्राप्त करेंगे परन्तु उन लाभुकों के मामले में जो कम वजन के रहेंगे अनाज प्राप्त करते रहेंगे. इस योजना को बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी या जिला कल्याण पदाधिकारी के माध्यम से लागू किया जाना था पर ऐसा हुआ नहीं. जबकि इस योजना को जारी रखने के लिए केन्द्र सरकार ने मार्च 2004 और मार्च 2006 में दोनों जिलों के लिए निदेषालय आईसीडीएस, समाज कल्याण विभाग बिहार के माध्यम से 12.41 करोड़ रुपये विषेष रुप से अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता प्रदान किया.उसमें से दोनों कजले के कल्याण पदाधिकारी ने 6.58 करोड़ रुपये प्रत्येक 3.29 करोड़ रुपये प्रत्येक भारतीय खाद निगम एफसीआई गया को 11,100 मि.टन अनाज प्राप्त करने के लिए और 20.35 लाख रुपये हरेक जिले के राज्य खाद्य निगम को अनाज एफसीआई से उनके गोदाम में लाने का परिवहन मूल्य को चुकाने के लिए अग्रिम जून 2005 को दिया.नवम्बर 2008 तक एसएफसी औरंगावाद ने 530.12 मि.टन और एसएफसी गया ने 1274.16 मि.टन खाद्यान्न गेहूं का एफसीआई से उठाव किया था. जबकि इस कार्यक्रम के अन्तर्गत औरंगावाद में 31959 लाभुकों और गया में 73116 लाभुकों की पहचान की गयी थी. जिनके लिए 191.8 मि.टन और 365.6 मि.टन खाद्यान्न प्रतिमाह की जरूरत थी.5550 मि.टन के लिये अग्रिम और पूर्वोक्त मात्रा में खाद्यान्न आवष्यकता के विरूद्ध बाल विकास परियोजना पदाधिकारी औरंगावाद केवल 64.23 मि.टन खाद्यान्न चावल 43.72 मि.टन और गेहूं 20.51 मि.टन जो एक महीने के लिए भी पर्याप्त नहीं था का उठाव किया जबकि वाल विकास परियोजना पदाधिकारी गया 1007.89 मि.टन गेहूं विगत दो साल 2005-07 की अवधि में उठाव किया. इस प्रकार दोनों जिले में निधि उपलब्ध रहने के बावजूद खाद्यान्न का उठाव नहीं हो पाया जिससे वे इस कार्यक्रम को लागू करने में असफल रहे और विषेष अतिरिक्त सहायता के रूप में उपलब्ध कराये गये 12.42 करोड़ रुपये में से केवल 60 लाख रुपये यानि 4.83 प्रतिषत ही खर्च कर सके. परिणामस्वरूप एफसीआई व एसएफसी तथा जिला कल्याण पदाधिकारी के पास 11.82 करोड़ रुपये दो से चार वर्षों तक अवरूद्ध रहा पर एनपीएजी का लाभुकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका.जिससे राष्ट्रीय पोषण अभियान योजना का राज्य में वांछित उद्देष्य प्राप्त नहीं किया जा सका. कैग ने इस पर गहरी आपत्ति जतायी है और इस योजना से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ कार्रवायी के लिए राज्य सरकार को अप्रैल 2008 में ही लिखा था पर सरकार ने दिसम्बर 2008 तक कोई कार्रवाई की सूचना कैग उपलब्ध नहीं करा पायी थी जबकि यह एक गंभीर मामला था.

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