पटना : अभी इसी माह की पहली तारीख को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल के सभागार में लोगों की खचाखच भीड़ के बीच, हिन्दी पत्रकारिता के स्तम्भ प्रभाष जोशी. बिहार को नयी राजनीति का चेहरा दिखा रहे थे. यही उनकी आखिरी बाहरी यात्रा भी रही. वो मुसलमानों को नयी राजनीति शुरू करने की सलाह दे रहे थे. उनकी इस राय पर बिहार के कोने-कोने से जमा भीड़ ने तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ उनके विचार प्रवाह को समर्थन दिया था. तब वे आत्मविश्वास से भर गये थे, और देश की 62 साल की राजनीति पर अपने तजुर्बे के आधार पर रौशनी डाली थी. पर 5 नवम्बर की रात उनकी अचानक मौत की खबर ने, बिहार के उन लोगों को स्तब्ध कर दिया जो, उनके इस तर्क से सहमत दिख रहे थे, कि देश की राजनीति को बदलने की जरूरत है. तब जोशी जी भी नहीं जानते थे कि, 1 नवम्बर की उनकी बिहार यात्रा अंतिम यात्रा होगी क्योंकि वे, यहां से लौटने के चार दिनों के बाद ही इस दुनिया से कूच कर जायेंगे.
जोशी जी, गत 1 नवम्बर को, जसवंत सिंह की जिन्ना और भारत पाक बंटवारा पर, लिखी पुस्तक के उर्दू संस्करण का विमोचन करने, श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल पहुंचे थे. मंच पर उनके पहुंचते ही पत्रकार दीर्घा में बैठे, पत्रकारों एवं स्तम्भकारों ने उनका हाथ उठाकर अभिवादन किया था. उन्होंने अपने अनुज पत्रकार बन्धुओं के अभिवादन को स्वीकार किया. हाथ उठा उठाकर वे उनके आदाब सलाम का जवाब देते, आत्मविश्वास से लबरेज थे. जोशी जी का बिहार से काफी लगाव रहा. वे बिहारी पत्रकारों के बुलावे पर अपनी व्यस्तता के रहते भी समय निकाल यहां दौड़े चले आते थे.
1 नवम्बर को राज्यसभा सदस्य व संगम उर्दू दैनिक के चीफ एडीटर डॉ. एजाज अली के बुलावे पर वे पटना पहुंचे थे. उन्होंने जसवंत सिंह की पुस्तक विमोचन के उपरांत, उपस्थित जन समूह को सम्बोधित करते हुए कहा था कि मुसलमान, युवाओं व बुजूर्गों की इतनी बड़ी भीड़ इस हाल में सिर्फ पुस्तक विमोचन के लिए जमा नहीं हुई है, बल्कि राज्य के मुसलमान नयी राजनीति शुरू करना चाहते हैं. उन्होंने कहा था कि, देश के मुसलमानों को सीना ठोंक कर राजनीति करनी चाहिए और अपनी राजनीति शुरू करनी चाहिए. उनके साथ जायें जो उनकी समस्याओं का निदान निकाले और उनके हक व हकूक को अमली जामा पहनाये. सच्चर आयोग की रिर्पोट ने यह साफ कर दिया है कि मुसलमान आज कहां है. इसलिए न लालू की सुनें और न ही नीतीश की. जसवंत के नेतृत्व मेें नयी राजनीति शुरू करें, यही वक्त की मांग है. उनके अभिभाषण का एक-एक शब्द उपस्थित जनसमूह, पूरी खामोशी के साथ न सिर्फ सुन रहा था बल्कि, कलम के उस मजबूत सिपाही के मार्ग दर्शन पर तालियां बजाकर मुहर भी लगा रहा था.
5 नवंबर को उनकी मौत, भारत आस्ट्रेलिया के बीच हुए वनडे मैच में सचिन की बेहतरीन पारी के बाद भी, भारत की हार के बाद दिल का दौरा पडऩे के कारण हुई. जैसा सभी जानते हैं, वे क्रिकेट शौक से देखते थे. और सचिन और गावस्कर उनके चहेतों में से थे. 5 नवम्बर को भारत आस्ट्रेलिया वनडे मैच में सचिन ने जिस जांबाजी के साथ खेल का प्रदर्शन किया 175 रन बनाये फिर भी भारत 3 रनों से हार गया. इस शॉक को शायद जोशी जी झेल नहीं पाये और उन्हें दिल का दौरा पड़ा आनन फानन में घर के लोग उन्हें अस्पताल ले गये, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. बहुत लोग शायद नहीं जानते होंगे कि जोशी जी, 18 नवम्बर को भी पटना के पत्रकार श्रीकांत जी की पुत्री की शादी में भाग लेने के लिए आनेवाले थे. पर ऐसा हो न सका और 1 नवम्बर उनकी अंतिम बिहार यात्रा बन कर रह गयी.
रविवार, 8 नवंबर 2009
शनिवार, 7 नवंबर 2009
2010 के मार्च तक बिहार में पानी व अनाज का पड़ जायेगा टोटा
पटना : आपदा प्रबंधन विभाग बिहार सरकार के विशेष सचिव डॉ. सत्येन्द्र कुमार ने कहा कि आपका प्रवन्धन में कम्युनिकेशन का अहम रोल है पर मैसेज लोगों को उनकी भाषा मेें मिले जिसे वे आसानी से ग्रहण कर लें तभी यह लाभकारी होगा अभी ऐसा नहीं हो रहा है. उन्होंने कहा कि मार्च 2010 तक राज्य के लोगों की अनाज व पीने के पानी की समस्या से दो चार होना पड़ेगा इसके लिए सरकार ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर कार्य योजना तैयार की है समारोह के मुख्य अतिथि विधानसभा के सभापति उदय नारायण चौधरी ने कहा कि मोबाईल कंपनियों को दुर दराज के देहातों तक अपनी सेवा पहुंचानी होगी तभी हम आपदा के समय उन्हें राहत पहुंचाने में सक्षम होंगे.
एयरटेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिहार शिशिर कुमार ने कहा कि बिहार में भारती पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के सिद्घांत पर कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार है. मोबाइल के माध्यम से आपदा के समय पर, हम जनजीवन की सुरक्षा में भरपुर सहयोग कर सकते हैं. साथ ही हम उन्नत खेती के तरीकों से किसानों को प्रशिक्षित करने के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी दायित्व निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं इसके लिए 2010 तक बिहार में 500 सत्य भारती स्कूल खोले जाएंगें तथा वैसे स्कूलों को भारती, गोद लेगा और उसे पूरा सहयोग प्रदान क रेंगे. उन स्कूलों के बच्चों को शिक्षा के साथ वोकेशनल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा तथा वोकेशनल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा तथा स्कूलों के रख-रखाव का पूरा खर्च एयरटेल भुगतान करेगा. उन्होंने आगे कहा कि सत्य भारती सिविल सेकेंडरी सह वोकेशनल प्रशिक्षण स्कूल खोले जाएंगे जिसमें छात्रों को मोबाइल रिपेयेरिंग के साथ-साथ इन्टरनेट की जानकारी प्रदान की जाएगी. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देश की आबादी तेजी से बढ़ रही है वैसी हालत में हम युवाओं को जीविकोपार्जन के लिए नयी तकनीक से रूबरू नहीं करा पाये तो, आने वाले समय म ें हम देश का कल्याण नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि अच्छे विजनेस लीडर के पहले अच्छा इंसान बनना पड़ेगा. वे यहां पटना के होटल अशोक में आपदा व सूचना टेक्नॉलोजी और कम्युनिकेशन पर अपना विचार व्यक्त कर रहे थे. उन्होंने कोसी क्षेत्र में बाढ़ की विभिषिका के समय एयरटेल की ओर से पहुंचाने गये राहत की भी चर्चा की और कहा कि उनका संस्थान स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करने के इच्छुक हैं. इस अवसर पर संजय पाण्डेय, अनुराग प्रसाद, सीआर एस के फादर मांजेकर ने भी अपना विचार व्यक्त किया. कार्यक्रम का संचालन सीआरएम के नीतीश कुमार कर रहे थे.
एयरटेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बिहार शिशिर कुमार ने कहा कि बिहार में भारती पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के सिद्घांत पर कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार है. मोबाइल के माध्यम से आपदा के समय पर, हम जनजीवन की सुरक्षा में भरपुर सहयोग कर सकते हैं. साथ ही हम उन्नत खेती के तरीकों से किसानों को प्रशिक्षित करने के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी दायित्व निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं इसके लिए 2010 तक बिहार में 500 सत्य भारती स्कूल खोले जाएंगें तथा वैसे स्कूलों को भारती, गोद लेगा और उसे पूरा सहयोग प्रदान क रेंगे. उन स्कूलों के बच्चों को शिक्षा के साथ वोकेशनल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा तथा वोकेशनल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा तथा स्कूलों के रख-रखाव का पूरा खर्च एयरटेल भुगतान करेगा. उन्होंने आगे कहा कि सत्य भारती सिविल सेकेंडरी सह वोकेशनल प्रशिक्षण स्कूल खोले जाएंगे जिसमें छात्रों को मोबाइल रिपेयेरिंग के साथ-साथ इन्टरनेट की जानकारी प्रदान की जाएगी. उन्होंने कहा कि जिस प्रकार देश की आबादी तेजी से बढ़ रही है वैसी हालत में हम युवाओं को जीविकोपार्जन के लिए नयी तकनीक से रूबरू नहीं करा पाये तो, आने वाले समय म ें हम देश का कल्याण नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि अच्छे विजनेस लीडर के पहले अच्छा इंसान बनना पड़ेगा. वे यहां पटना के होटल अशोक में आपदा व सूचना टेक्नॉलोजी और कम्युनिकेशन पर अपना विचार व्यक्त कर रहे थे. उन्होंने कोसी क्षेत्र में बाढ़ की विभिषिका के समय एयरटेल की ओर से पहुंचाने गये राहत की भी चर्चा की और कहा कि उनका संस्थान स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर कार्य करने के इच्छुक हैं. इस अवसर पर संजय पाण्डेय, अनुराग प्रसाद, सीआर एस के फादर मांजेकर ने भी अपना विचार व्यक्त किया. कार्यक्रम का संचालन सीआरएम के नीतीश कुमार कर रहे थे.
देश विभाजन के सच को उजागर करते रहेंगे डा.एजाज
पटना: जसवंत सिंह की जिन्ना पर लिखी पुस्तक के विमोचन के बहाने पटना में सफल कार्यक्रम आयोजित कर सांसद डा.एजाज अली ने यह साबित कर दिया है कि बंटवारे का दुख आज भी भारतीय मुसलमानों को है और वे फिर से एक साथ रहना चाहते हैं.साथ ही इस सम्मेलन ने इस बहस को आगे भी जारी रखने का रास्ता खोल दिया है कि देश के विभाजन का असल जिम्मेदार कौन है? जसवंत सिंह की किताब ने बंटवारे के लिए जिन्ना,नेहरू और पटेल को समान रूप से दोषी ठहरा कर इस बात का खुलासा किया है कि बंटवारे के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराने की बजाये उस समय के लीडरों पर इसकी जिम्मेदारी थोपी जाए तो ज्यादा बेहतर होगा. डा. एजाज इस मिशन को आगे भी जारी रखना चाहते हैं. उनका मानना है कि भाजपा व कांग्रेस दोनों पार्टियों देश के विभाजन के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराती रही हैं और इसका प्रचार भी कराती रही हैं. असल में भाजपा और कांग्रेस का इस इश्यू पर परस्पर सांठगांठ है क्योंकि मुसलमाना को भाजपा का डर दिखा कर कांग्रेस वोट प्राप्त करती रही हैं जबकि मुसलमानों को पाकिस्तान से जोड़ भाजपा हिन्दुओं का वोट प्राप्त करती रही हैं. जसवंत ने इस बात का खुलासा किया है कि किस प्रकार कुर्सी की चाह में जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल ने पाकिस्तान के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी जबकि महात्मा गांधी ने इसका विरोध किया था.
एक नवम्बर को लोगों से खचाखच भड़े पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में वक्ताओं ने राज्य के कोने कोने से आये अवाम को बंटवारे के सच से रूबरू कराया. उपस्थित भीड़ बार बार तालियां बजाकर वक्ताओं की हौसला अफ्जाई करते रहे. सम्मेलन की सफलता ने डा.एजाज अली की राजनीतिक हैसियत को नयी उंचाई दी है साथ ही आम मुसलमानों के नेता के रूप में भी स्थापित किया है. सम्मेलन में उमड़ी भीड़ डा.एजाज के जनाधार और लोगों पर उनकी पकड़ को साफ तौर पर दर्शा रहा था. बिहार में सम्मेलन की सफलता के बाद वे अब बंगाल में इसी विषय पर सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी में जुट गये हैं.उनकी मुहिम सोशलिस्ट-कम्युनिष्टï विचारधारा को एकजुट कर देश में नयी राजनीति शुरु करने की है ताकि देश के मानचित्र से देश को विखंडित करनेवाली भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां सत्ता से बाहर रहें.
एक नवम्बर को लोगों से खचाखच भड़े पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में वक्ताओं ने राज्य के कोने कोने से आये अवाम को बंटवारे के सच से रूबरू कराया. उपस्थित भीड़ बार बार तालियां बजाकर वक्ताओं की हौसला अफ्जाई करते रहे. सम्मेलन की सफलता ने डा.एजाज अली की राजनीतिक हैसियत को नयी उंचाई दी है साथ ही आम मुसलमानों के नेता के रूप में भी स्थापित किया है. सम्मेलन में उमड़ी भीड़ डा.एजाज के जनाधार और लोगों पर उनकी पकड़ को साफ तौर पर दर्शा रहा था. बिहार में सम्मेलन की सफलता के बाद वे अब बंगाल में इसी विषय पर सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी में जुट गये हैं.उनकी मुहिम सोशलिस्ट-कम्युनिष्टï विचारधारा को एकजुट कर देश में नयी राजनीति शुरु करने की है ताकि देश के मानचित्र से देश को विखंडित करनेवाली भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां सत्ता से बाहर रहें.
बटाईदारी पर फिर मचा बवाल
पटना:उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के बटाईदारों को पचास हजार का किसान विकास पत्र दिये जाने की घोषणा के बाद से राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गयी है.जहां विपक्षी दल इस मुदïदे को हवा दे रहे हैं वहीं भाजपा के कई बुजूर्ग नेता मोदी के हाथों से पार्टी का नेतृत्व छीनने की वकालत करने लगे हैं. अपने ही दलों के नेताओं के विरोध में उठ खड़े होने के कारण मोदी सफाई की मुद्रा में आ गये हैं इस बार पार्टी में मोदी के विरोधियों को उन्हें घेरने का बड़ा हथियार हाथ लगा है.इससे वे मोदी को आम जनता के सामने भी बेनकाब करना चाह रहे हैं ताकि वे यह जान सकें कि मोदी की सोच जमीन मालिकों के प्रति कैसी है.हांलांकि अपनी सफाई में मोदी ने कहा कि केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के जरिये कोई बटाईदार किसी भी सूरत में जमीन का मालिकाना हक हासिल नहीं कर सकता है. दुनिया की कोई भी ताकत भूमि मालिकों को जमीन से जुदा नहीं कर सकती है. ऐसा कोई कानून है ही नहीं. उन्होंने भाजपा में अपने खिलाफ भड़के गुस्से पर कोई टिप्पणी नहीं की और इस आशय के तमाम सवालों को वे 'नो कमेंटÓ बोल टालते चले गये. हां, पत्रकारों से उन्होंने यह जरूर कहा कि क्या ऐसे बेतुके मसले राजग के वोटरों को भ्रमित कर सकते हैं. राजद व लोजपा ने अपने राजनीतिक स्वार्थो की पूर्ति के लिए बटाईदारी के मसले पर अनावश्यक भ्रम फैला रखा है. उनकी तमाम पक्षों से अपील रही कि सतही राजनीति के चक्कर में राज्य में कायम सदभाव को न बिगाड़ें. उन्होंने कहा किÓप्रदेश की एक करोड़ चार लाख होल्डिंग में 92.5 प्रतिशत लघु व सीमांत किसान हैं. ये बस एक से दो हेक्टेयर जमीन के मालिक हैं. इनकी स्थिति बटाईदार और मजदूरों से भी बदतर है. बिहार क्या, भारत में भी ऐसा कोई कानून नहीं है, जो इनको जमीन के मालिकाना हक से बेदखल कर सके. हमने तो ऐसे किसी कानून के बारे में सपने में भी नहीं सोचा है. इसी क्रम में मोदी ने एक प्रसंग का जिक्र किया किÓ1967 की मिली-जुली सरकार में कम्युनिस्ट पार्टी के साथ जनसंघ भी था. वामपंथी पार्टियों के दबाव पर बटाईदारी कानून लाने की कोशिश हुई. इसको रोकने के लिए जनसंघ कोटे के मंत्री कैबिनेट की बैठक में ही कम्युनिस्ट मंत्रियों से उलझ गये थेÓ उन्होंने कई मर्तबा दोहराया-Óबटाईदार कानून के बारे में कोई सुझाव, विचार, पहल या प्रस्ताव नहीं है. किसी को भ्रमित होने की दरकार नहीं है. उनके अनुसार केसीसी के बारे में हमने कुछ नहीं किया है. हमने बस नाबार्ड के गाईडलाईन को दोहराया है. यह व्यवस्था 2000 से है. हमें इसमें संशोधन का भी अधिकार नहीं है. केसीसी का भूमि सुधार, वंदोपाध्याय कमेटी या बटाईदारी कानून से कोई मतलब नहीं है. बटाईदारी पर भाजपा के ही लोगों ने बावेला मचाया है खुद उसके विधायकों ने इस मुददे पर मोदी के खिलाफ आग उगल रहे हैं ऐसे में विरोधी दल वाले तो रोटी सेकेंगे ही.सो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद इसे इश्यू बनाने से कैसे चूकते. उनके अनुसार बटाईदारी व खेती करने वालों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए जाने के सरकार के बयान से गांव-गांव में बवाल मचा हुआ है. इससे खुद सत्ताधारी दल के नेताओं के बीच घमासान की स्थिति पैदा हो गयी है. सरकार रोजाना जनता के बीच भ्रम उत्पन्न कर रही है.
बटाईदारी पर चर्चा करते हुए लालू प्रसाद ने कहा कि यह किसी जाति विशेष का मामला नहीं है. गांव में दो-चार बीघा जोत का व्यक्ति बाहर नौकरी करता है. ऐसी स्थिति में उसको जमीन से हाथ धोना पड़ेगा. सरकार ने प्रमण्डलीय आयुक्तों को कोई निर्देश नहीं दिया और कह दिया कि खेत जोतने वाले को किसान क्रेडिट कार्ड मिलेगा. जिनके पास किसान क्रेडिट कार्ड है भी तो रुपया नहीं मिला है.
बटाईदारी पर चर्चा करते हुए लालू प्रसाद ने कहा कि यह किसी जाति विशेष का मामला नहीं है. गांव में दो-चार बीघा जोत का व्यक्ति बाहर नौकरी करता है. ऐसी स्थिति में उसको जमीन से हाथ धोना पड़ेगा. सरकार ने प्रमण्डलीय आयुक्तों को कोई निर्देश नहीं दिया और कह दिया कि खेत जोतने वाले को किसान क्रेडिट कार्ड मिलेगा. जिनके पास किसान क्रेडिट कार्ड है भी तो रुपया नहीं मिला है.
सुर-संग्राम के विजेता आलोक को फैसले पर ऐतराज
पटना: सुर-संग्राम का फाइनल ऐतिहासिक गांघी मैदान में एक खूबसूरत मुकाम पर पहुंच कर संपन्न हुआ. बिहार के आलोक कुमार व उत्तर प्रदेश के मोहन राठौर को संयुक्त रूप से विजेता घोषित करते हुए आयोजकों ने 25-25 लाख रुपये का चेक व बाइक की चाबी थमा दी पर इस कार्यकम के विजेता आलोक कुमार को इस बात का मलाल है कि उन्हें दो प्रतिशत अधिक मत आने के बाद भी एकल विजेता क्यों नहीं घोषित किया गया. शनिवार को लोजपा कार्यालय में आलोक का भव्य स्वागत किया गया. राज्य का नाम रौशन करने वाले इस कलाकार को लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान, प्रदेश लोजपा अध्यक्ष पशुपति नाथ पारस और दलित सेना के राष्टï्रीय अध्यक्ष रामचन्द्र पासवान ने मिठाई खिलाया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की.आलोक राज्य के लखीसराय का निवासी है.
आलोक से जब यह पूछा गया कि उन्हें दो प्रतिशत अधिक मत आने के बाद भी क्यों नहीं विजेता घोषित किया गया इस पर अपनी प्रतिक्रिया में आलोक ने कहा कि किस नियम के तहत ऐसा किया गया यह तो महुआ चैनल ही जाने पर दो प्रतिशत अधिक वोट काफी अधिक होता है.प्रतियोगिता में एक-एक वोट कीमत होती है. आयोजकों द्वारा दोनों को 25-25 लाख प्रदान करना दूसरी बात है पर उसे मंच पर विजेता घोषित करना चाहिए था.उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम के संचालक व एंकर भोजपुरी फिल्म के सुपर स्टार रवि किशन बार-बार यह कहते सुने गये कि जीतेगा बिहार कि यूपी इसका फैसला प्रतिभागियों को प्राप्त वोटों से पता चलेगा पर ऐन वक्त पर दोनों को विजेता घोषित कर दिया गया.
आलोक से जब यह पूछा गया कि उन्हें दो प्रतिशत अधिक मत आने के बाद भी क्यों नहीं विजेता घोषित किया गया इस पर अपनी प्रतिक्रिया में आलोक ने कहा कि किस नियम के तहत ऐसा किया गया यह तो महुआ चैनल ही जाने पर दो प्रतिशत अधिक वोट काफी अधिक होता है.प्रतियोगिता में एक-एक वोट कीमत होती है. आयोजकों द्वारा दोनों को 25-25 लाख प्रदान करना दूसरी बात है पर उसे मंच पर विजेता घोषित करना चाहिए था.उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम के संचालक व एंकर भोजपुरी फिल्म के सुपर स्टार रवि किशन बार-बार यह कहते सुने गये कि जीतेगा बिहार कि यूपी इसका फैसला प्रतिभागियों को प्राप्त वोटों से पता चलेगा पर ऐन वक्त पर दोनों को विजेता घोषित कर दिया गया.
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