माँ नही रही पिछले ९ जून 2009 को उनका निधन हो गया,मैं उनके पास उस समय नही था यह मेरे लिए दुखद था जिसके लिए मैं जीवन भर ख़ुद को माफ़ नही कर सकूँगा।
शमशाद आलम
बुधवार, 24 जून 2009
शुक्रवार, 19 जून 2009
गुरुवार, 18 जून 2009
विकास के बाद अब धन्यवाद यात्रा
शमशादपटना : विकास यात्रा के दूसरे फेज के बाद अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार धन्यवाद यात्रा पर 17 जून से विधिवत निकल चुके हैं पर दूसरे फेज की विकास यात्रा भी तो धन्यवाद यात्रा का ही अभ्यास था. ऐसा डेहरी में दिये उनके वक्तव्य से लगता भी है. अब यह धन्यवाद यात्रा है या फिर विधानसभा उपचुनाव की तैयारी यह बहस का मुद्दा नहीं है, बात यह है कि इसी बहाने वे तक अपनी बातें पहुंचाने में सफल तो हो रहे है. डेहरी आन सोन की सभा में मुख्यमंत्री ने अपने द्वारा मांगी गयी मजूरी और फिर किए गए काम को काफी प्रमुखता से रखा. कहा-हम चुनाव के समय आपसे अपनी मजदूरी मांगने आये थे. आपने हमें भरपूर मजदूरी दी. धन्यवाद आपका. और हां काम भी हम खूब कर रहे है. पहले जो वादा किया था उसे बखूबी निभाया. लोकसभा चुनाव के समय वादा किया था कि डेहरी में डेयरी प्लांट और फिर डालमियानगर में पालिटेकनिक खुलेगा. इन सब के लिए पैसे की व्यवस्था की. उन्हे आवंटित किया. जगह की व्यवस्था हुई और आज शिलान्यास किया. जो वादा किया वह निभाया. ऐसा पहली बार देखा जा रहा है जब किसी राज्य का मुख्यमंत्री चुनाव में जीतने के बाद जनता के बीच जाकर उन्हें धन्यवाद दे रहा हो. इस बार वे उन जिलों में जा रहे हैं जहां पिछली बार नहीं गये थे. अपनी सभाओं में वे लोगों की समस्याओं को सुन रहे हैं और उसके समाधान का आश्वासन दे रहे हैं. पूर्व में किये वायदों के पूरा नहीं होने की याद दिलाने पर वे जनता को फिर से आश्वासन की घुटटी पिला रहे हैं. जिन कामों को कर चुके हैं उनके बारे में तो मंच से ही लोगों को कर्ज उतारने की बात कह उन पर ऐहसान जताने का प्रयास कर रहे हैं कि वे वादे निभाने के लिए करते हैं. उनकी सभाओं में इस बार एक बात खास तौर पर देखने को यह मिल रहा है कि वे लालू-रामविलास को निषाना बनाने की बजाये केन्द्र की कांग्रेस सरकार पर प्रहार कर रहे हैं. बिजली की खराब स्थिति के सवाल पर लोगों के उठाये गये सवाल से लेकर अनाज वितरण का क्रम टूटने तक के लिए वे केन्द्र सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. साथ ही राज्य को विषेष राज्य का दर्जा दिलाने की अपनी मुहिम में लोगों से शामिल होने का आह्वान भी करते नजर आ रहे हैं. वजह साफ है.आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में वे अभी से जुट गये हैं. 17 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव व 24 निकाय विधान पार्षदों का चुनाव सिर पर अलग है इसलिए वे विरोधियों को कोई मौका नहीं देना चाहते ताकि वे उन पर वार कर सकें. कारण इन सीटों में से अधिकतर राजग की ही सीटें हैं जिसे फिर से जीत लाने का उनपर दबाव रहेगा अन्यथा मैसेज खराब जा सकता है. फतुहा विधानसभा उपचुनाव में सरकार को अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ी तब कहीं लोजपा उम्मीदवार हारा. फतुहा सीट पर जदयू का ही कब्जा था उपचुनाव में पुन: सीट निकाल लेने से राजग खेमे में संतोष है. उधर विपक्षी दल राजद-लोजपा अपने हतोत्साहित कार्यकर्ताओं को चार्ज करने की मुहिम तेज कर दी है. उनके सामने दल में आयी भगदर को रोकने की चुनौती है. लोजपा और राजद में मलाईदार पदों पर रहने वाले कई नेता पाला बदलकर अब जदयू की तैयार छाछ पीने पहुंच रहे हैं. इससे पुराने कार्यकर्ताओं की बेचैनी बढ़ी है कारण साधन सम्पन्न ये नेता तो इन्हीं की न हक मारी करेंगे. इनमें से कई तो मक्खनबाजी में महारत रखते हैं.
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