रविवार, 8 नवंबर 2009

नया बिहार तलाश रहे थे प्रभाष जोशी

पटना : अभी इसी माह की पहली तारीख को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल के सभागार में लोगों की खचाखच भीड़ के बीच, हिन्दी पत्रकारिता के स्तम्भ प्रभाष जोशी. बिहार को नयी राजनीति का चेहरा दिखा रहे थे. यही उनकी आखिरी बाहरी यात्रा भी रही. वो मुसलमानों को नयी राजनीति शुरू करने की सलाह दे रहे थे. उनकी इस राय पर बिहार के कोने-कोने से जमा भीड़ ने तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ उनके विचार प्रवाह को समर्थन दिया था. तब वे आत्मविश्वास से भर गये थे, और देश की 62 साल की राजनीति पर अपने तजुर्बे के आधार पर रौशनी डाली थी. पर 5 नवम्बर की रात उनकी अचानक मौत की खबर ने, बिहार के उन लोगों को स्तब्ध कर दिया जो, उनके इस तर्क से सहमत दिख रहे थे, कि देश की राजनीति को बदलने की जरूरत है. तब जोशी जी भी नहीं जानते थे कि, 1 नवम्बर की उनकी बिहार यात्रा अंतिम यात्रा होगी क्योंकि वे, यहां से लौटने के चार दिनों के बाद ही इस दुनिया से कूच कर जायेंगे.
जोशी जी, गत 1 नवम्बर को, जसवंत सिंह की जिन्ना और भारत पाक बंटवारा पर, लिखी पुस्तक के उर्दू संस्करण का विमोचन करने, श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल पहुंचे थे. मंच पर उनके पहुंचते ही पत्रकार दीर्घा में बैठे, पत्रकारों एवं स्तम्भकारों ने उनका हाथ उठाकर अभिवादन किया था. उन्होंने अपने अनुज पत्रकार बन्धुओं के अभिवादन को स्वीकार किया. हाथ उठा उठाकर वे उनके आदाब सलाम का जवाब देते, आत्मविश्वास से लबरेज थे. जोशी जी का बिहार से काफी लगाव रहा. वे बिहारी पत्रकारों के बुलावे पर अपनी व्यस्तता के रहते भी समय निकाल यहां दौड़े चले आते थे.
1 नवम्बर को राज्यसभा सदस्य व संगम उर्दू दैनिक के चीफ एडीटर डॉ. एजाज अली के बुलावे पर वे पटना पहुंचे थे. उन्होंने जसवंत सिंह की पुस्तक विमोचन के उपरांत, उपस्थित जन समूह को सम्बोधित करते हुए कहा था कि मुसलमान, युवाओं व बुजूर्गों की इतनी बड़ी भीड़ इस हाल में सिर्फ पुस्तक विमोचन के लिए जमा नहीं हुई है, बल्कि राज्य के मुसलमान नयी राजनीति शुरू करना चाहते हैं. उन्होंने कहा था कि, देश के मुसलमानों को सीना ठोंक कर राजनीति करनी चाहिए और अपनी राजनीति शुरू करनी चाहिए. उनके साथ जायें जो उनकी समस्याओं का निदान निकाले और उनके हक व हकूक को अमली जामा पहनाये. सच्चर आयोग की रिर्पोट ने यह साफ कर दिया है कि मुसलमान आज कहां है. इसलिए न लालू की सुनें और न ही नीतीश की. जसवंत के नेतृत्व मेें नयी राजनीति शुरू करें, यही वक्त की मांग है. उनके अभिभाषण का एक-एक शब्द उपस्थित जनसमूह, पूरी खामोशी के साथ न सिर्फ सुन रहा था बल्कि, कलम के उस मजबूत सिपाही के मार्ग दर्शन पर तालियां बजाकर मुहर भी लगा रहा था.
5 नवंबर को उनकी मौत, भारत आस्ट्रेलिया के बीच हुए वनडे मैच में सचिन की बेहतरीन पारी के बाद भी, भारत की हार के बाद दिल का दौरा पडऩे के कारण हुई. जैसा सभी जानते हैं, वे क्रिकेट शौक से देखते थे. और सचिन और गावस्कर उनके चहेतों में से थे. 5 नवम्बर को भारत आस्ट्रेलिया वनडे मैच में सचिन ने जिस जांबाजी के साथ खेल का प्रदर्शन किया 175 रन बनाये फिर भी भारत 3 रनों से हार गया. इस शॉक को शायद जोशी जी झेल नहीं पाये और उन्हें दिल का दौरा पड़ा आनन फानन में घर के लोग उन्हें अस्पताल ले गये, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. बहुत लोग शायद नहीं जानते होंगे कि जोशी जी, 18 नवम्बर को भी पटना के पत्रकार श्रीकांत जी की पुत्री की शादी में भाग लेने के लिए आनेवाले थे. पर ऐसा हो न सका और 1 नवम्बर उनकी अंतिम बिहार यात्रा बन कर रह गयी.

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