पटना: जसवंत सिंह की जिन्ना पर लिखी पुस्तक के विमोचन के बहाने पटना में सफल कार्यक्रम आयोजित कर सांसद डा.एजाज अली ने यह साबित कर दिया है कि बंटवारे का दुख आज भी भारतीय मुसलमानों को है और वे फिर से एक साथ रहना चाहते हैं.साथ ही इस सम्मेलन ने इस बहस को आगे भी जारी रखने का रास्ता खोल दिया है कि देश के विभाजन का असल जिम्मेदार कौन है? जसवंत सिंह की किताब ने बंटवारे के लिए जिन्ना,नेहरू और पटेल को समान रूप से दोषी ठहरा कर इस बात का खुलासा किया है कि बंटवारे के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराने की बजाये उस समय के लीडरों पर इसकी जिम्मेदारी थोपी जाए तो ज्यादा बेहतर होगा. डा. एजाज इस मिशन को आगे भी जारी रखना चाहते हैं. उनका मानना है कि भाजपा व कांग्रेस दोनों पार्टियों देश के विभाजन के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराती रही हैं और इसका प्रचार भी कराती रही हैं. असल में भाजपा और कांग्रेस का इस इश्यू पर परस्पर सांठगांठ है क्योंकि मुसलमाना को भाजपा का डर दिखा कर कांग्रेस वोट प्राप्त करती रही हैं जबकि मुसलमानों को पाकिस्तान से जोड़ भाजपा हिन्दुओं का वोट प्राप्त करती रही हैं. जसवंत ने इस बात का खुलासा किया है कि किस प्रकार कुर्सी की चाह में जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल ने पाकिस्तान के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी जबकि महात्मा गांधी ने इसका विरोध किया था.
एक नवम्बर को लोगों से खचाखच भड़े पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल में वक्ताओं ने राज्य के कोने कोने से आये अवाम को बंटवारे के सच से रूबरू कराया. उपस्थित भीड़ बार बार तालियां बजाकर वक्ताओं की हौसला अफ्जाई करते रहे. सम्मेलन की सफलता ने डा.एजाज अली की राजनीतिक हैसियत को नयी उंचाई दी है साथ ही आम मुसलमानों के नेता के रूप में भी स्थापित किया है. सम्मेलन में उमड़ी भीड़ डा.एजाज के जनाधार और लोगों पर उनकी पकड़ को साफ तौर पर दर्शा रहा था. बिहार में सम्मेलन की सफलता के बाद वे अब बंगाल में इसी विषय पर सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी में जुट गये हैं.उनकी मुहिम सोशलिस्ट-कम्युनिष्टï विचारधारा को एकजुट कर देश में नयी राजनीति शुरु करने की है ताकि देश के मानचित्र से देश को विखंडित करनेवाली भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियां सत्ता से बाहर रहें.
शनिवार, 7 नवंबर 2009
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