पटना:उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के बटाईदारों को पचास हजार का किसान विकास पत्र दिये जाने की घोषणा के बाद से राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गयी है.जहां विपक्षी दल इस मुदïदे को हवा दे रहे हैं वहीं भाजपा के कई बुजूर्ग नेता मोदी के हाथों से पार्टी का नेतृत्व छीनने की वकालत करने लगे हैं. अपने ही दलों के नेताओं के विरोध में उठ खड़े होने के कारण मोदी सफाई की मुद्रा में आ गये हैं इस बार पार्टी में मोदी के विरोधियों को उन्हें घेरने का बड़ा हथियार हाथ लगा है.इससे वे मोदी को आम जनता के सामने भी बेनकाब करना चाह रहे हैं ताकि वे यह जान सकें कि मोदी की सोच जमीन मालिकों के प्रति कैसी है.हांलांकि अपनी सफाई में मोदी ने कहा कि केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के जरिये कोई बटाईदार किसी भी सूरत में जमीन का मालिकाना हक हासिल नहीं कर सकता है. दुनिया की कोई भी ताकत भूमि मालिकों को जमीन से जुदा नहीं कर सकती है. ऐसा कोई कानून है ही नहीं. उन्होंने भाजपा में अपने खिलाफ भड़के गुस्से पर कोई टिप्पणी नहीं की और इस आशय के तमाम सवालों को वे 'नो कमेंटÓ बोल टालते चले गये. हां, पत्रकारों से उन्होंने यह जरूर कहा कि क्या ऐसे बेतुके मसले राजग के वोटरों को भ्रमित कर सकते हैं. राजद व लोजपा ने अपने राजनीतिक स्वार्थो की पूर्ति के लिए बटाईदारी के मसले पर अनावश्यक भ्रम फैला रखा है. उनकी तमाम पक्षों से अपील रही कि सतही राजनीति के चक्कर में राज्य में कायम सदभाव को न बिगाड़ें. उन्होंने कहा किÓप्रदेश की एक करोड़ चार लाख होल्डिंग में 92.5 प्रतिशत लघु व सीमांत किसान हैं. ये बस एक से दो हेक्टेयर जमीन के मालिक हैं. इनकी स्थिति बटाईदार और मजदूरों से भी बदतर है. बिहार क्या, भारत में भी ऐसा कोई कानून नहीं है, जो इनको जमीन के मालिकाना हक से बेदखल कर सके. हमने तो ऐसे किसी कानून के बारे में सपने में भी नहीं सोचा है. इसी क्रम में मोदी ने एक प्रसंग का जिक्र किया किÓ1967 की मिली-जुली सरकार में कम्युनिस्ट पार्टी के साथ जनसंघ भी था. वामपंथी पार्टियों के दबाव पर बटाईदारी कानून लाने की कोशिश हुई. इसको रोकने के लिए जनसंघ कोटे के मंत्री कैबिनेट की बैठक में ही कम्युनिस्ट मंत्रियों से उलझ गये थेÓ उन्होंने कई मर्तबा दोहराया-Óबटाईदार कानून के बारे में कोई सुझाव, विचार, पहल या प्रस्ताव नहीं है. किसी को भ्रमित होने की दरकार नहीं है. उनके अनुसार केसीसी के बारे में हमने कुछ नहीं किया है. हमने बस नाबार्ड के गाईडलाईन को दोहराया है. यह व्यवस्था 2000 से है. हमें इसमें संशोधन का भी अधिकार नहीं है. केसीसी का भूमि सुधार, वंदोपाध्याय कमेटी या बटाईदारी कानून से कोई मतलब नहीं है. बटाईदारी पर भाजपा के ही लोगों ने बावेला मचाया है खुद उसके विधायकों ने इस मुददे पर मोदी के खिलाफ आग उगल रहे हैं ऐसे में विरोधी दल वाले तो रोटी सेकेंगे ही.सो राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद इसे इश्यू बनाने से कैसे चूकते. उनके अनुसार बटाईदारी व खेती करने वालों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए जाने के सरकार के बयान से गांव-गांव में बवाल मचा हुआ है. इससे खुद सत्ताधारी दल के नेताओं के बीच घमासान की स्थिति पैदा हो गयी है. सरकार रोजाना जनता के बीच भ्रम उत्पन्न कर रही है.
बटाईदारी पर चर्चा करते हुए लालू प्रसाद ने कहा कि यह किसी जाति विशेष का मामला नहीं है. गांव में दो-चार बीघा जोत का व्यक्ति बाहर नौकरी करता है. ऐसी स्थिति में उसको जमीन से हाथ धोना पड़ेगा. सरकार ने प्रमण्डलीय आयुक्तों को कोई निर्देश नहीं दिया और कह दिया कि खेत जोतने वाले को किसान क्रेडिट कार्ड मिलेगा. जिनके पास किसान क्रेडिट कार्ड है भी तो रुपया नहीं मिला है.
शनिवार, 7 नवंबर 2009
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