रविवार, 30 अगस्त 2009

रोती हुई सड़कें छोड़ वो गये

शमशादपटना : आये भी गये, गये भी वो, खत्म फसाना हो गया. जी हां सड़क निर्माण विभाग के प्रधान सचिव आरके सिंह जी केंद्रीय प्रति नियुक्ति पर चले तो गये. पर अपने पीछे छोड़ गये रोती सड़कें, जो निर्माण के बाद से ही तत्काल मरम्मत मांगने लगी हैं. इस विभाग ने तमाम नियम कायदों को ताक पर रखकर सुशासन में सड़क निर्माण की गति तो जरूर तेज दिखायी. पर, निमार्ण कार्य के दौरान सरकारी धन की लूट में भी जमकर वृद्घि की. सीएजी की रिपोर्ट भी साफ साफ इस ओर इशारा करती है. कई जिलों के सड़क निर्माण कार्य की समीक्षा करने से यह स्पष्टï भी हो गया है. उदाहरण के लिये ग्रामीण कार्य प्रमंडल सीतामढ़ी द्वारा कराये गये कार्यों को देखा जाए तो इससे स्पष्टï हो जायेगा कि अधिकारी किस सफाई से संवेदकों की सांठ-गांठ से सरकारी राजस्व को दोनों हाथों से लूट रहे हंै. यह तभी संभव है जब संवेदक और अधिकारी की सांठगाठ हो. ग्रामीण कार्य प्रमंडल सीतामढ़ी अंतर्गत मुटलिया चक डुमरा के 3.68 किमी सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण का कार्य एक संवेदक को 89 लाख रुपये के प्राक्कलित मूल्य पर दिया गया. जिसका एकरारनामा मार्च 2006 में हुआ इसके अनुसार सितम्बर 2006 में इसे पूरा किया जाना था. कार्य नियत तिथि के अंदर पूरा किया भी गया और 87.32 लाख रुपये की राशि संवेदक को जुलाई 2007 में भुगतान कर दी गयी. इन अभिलेखों की जांच 2008 में हुई, इससे प्रकट हुआ कि प्राक्कलन के अनुसार स्टोन मेटल व चिप्स के लिए 215 किमी दूर शेखपुरा से प्रावधान किया. गया. सहायक खनन पदाधिकारी शेखपुरा के द्वारा जनवरी 2007 में प्रमाण पत्र निर्गत किया गया. पर जांच में प्रमाण पत्र नकली निकला. इस प्रकार कार्य में उपयोग किये गये 3086.81 घन मीटर स्टोन चिप्स के विरूद्घ 2.11 लाख रुपये की रायल्टी की छूट संवेदक द्वारा ली गई. चूंकि शेखपुरा खदान से स्टोन चिप्स प्राप्ति के विरूद्घ निर्गत रायल्टी छूट, प्रमाण पत्र नकली था इसलिए स्टोन मेटल, चिप्स का उपयोग भी संदेहास्पद था, परंतु इन पहलुओं को अंदेखा कर प्रमंडल के अधिकारियों ने निर्दिष्टï खदान से प्राप्ति की वास्तविकता सुनिश्चित किये बिना ही 87.32 लाख रुपये के चौथा चालू लेखा विपत्र ढुलाई के मूल्य सहित का भुगतान कर दिया गया. कैग ने इस पर गंभीर आपति व्यक्त की है तथा सरकार से स्थिति स्पष्टï करने को कहा है. ऐसे ही कार्य लखीसराय जिले में हुए जहां शेखपुरा से चिप्स को ढोये गये पर संवेदक को मिर्जापुर क्वेरी से स्टोन ढ़ोने का भुगतान कर दिया गया.

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