रविवार, 30 अगस्त 2009

कृषि के विकास की राशि से खरीद लिए वाहन

शमशाद
पटना : बिहार के लोग खेती पर निर्भर हैं पर इस राज्य में कृषि पर अनुसंधान के लिए आये पैसों को डायवर्ट कर लग्जरी गाडिय़ां खरीद ली गयी जिससे छात्रों का शिक्षण और प्रायोगिक कार्य प्रभावित हुआ जबकि कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी गाडिय़ों से सैर करते नजर आते हैं. इतना ही नहीं खरीदी गयी गाडिय़ों पर खर्च किये गये 28.30 को छात्रों की शिक्षा, यात्रा और शिक्षा देने, सुदृढ़ीकरण और शिक्षा के विकास मद में दिखा कर मामले को घालमेल करने का प्रयास किया गया. छात्रों को अत्याधुनिक शिक्षा देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने राज्य कृषि विश्वविद्यालय में कृषि शिक्षा के विकास और सुदृढ़ीकरण के लिए राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय पूसा समस्तीपुर को 2.27 करोड़ का अनुदान स्वीकृत किया जिसमें से 1.49 करोड़ विमुक्त हुआ. राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय ने 28.30 लाख खर्च कर चार गाडिय़ां खरीदीं, जिसमें तीन एम्बेस्डर कार, तीन वोलेरो और एक एम्बुलेन्स की खरीददारी की गयी. मिले अनुदान की रकम को कृषि के लिए अनुसंधान और शिक्षण को बेहतर बनाने की बजाये कारों के खरीद में लगा दिया. अगर कार्यालय कार्य के लिए गाडिय़ों की खरीद हुई भी थी तो उसे व्यय वाउचर में दर्शा देना चाहिए था पर वाउचर इस बात की पुष्टिï नहीं कर रहे थे कि गाडिय़ों की खरीद भी हुई यानि छात्रों की शिक्षा यात्रा और सुदृढ़ीकरण की बजाये गाडिय़ों की खरीद को तरजीह दी गयी. दिये गये अनुदान के समय यह स्पष्टï निर्देश दे दिया गया था कि इन मदों के अलावे किसी अन्य मद में आवंटन को डायवर्ट नहीं किया जाए बावजूद इसके वह सब हुआ. योजना उदïदेश्य शिक्षण और प्रायोगिक वर्गों का मौजूदा सुविधाओं का उत्थान और चालू सिविल कार्य को पूरा करना था.2.27 करोड़ में से 28.25 लाख रूपये छात्रावासों एवं शैक्षणिक भवनों के पुनरूत्थान पर, तीन लाख केन्द्रीय पुस्तकालय और महाविद्यालय के पुस्तकालयों के पुस्तकालयी पुस्तकों पर 193.75 लाख पुनरावृति व्यय जिसमें पाठय पुस्तक, प्रायोगिक मेनुअल, यूजी एवं पी.जी प्रायोगिक आकस्मिकताओं, कम्प्यूटर लैव , सेमिनार,कार्यशाला इत्यादि की तैयारी और दो लाख राष्टïीय छात्रवृति पर खर्च किये गये. इस अनुदान से नये औजारों की खरीद और नये सिविल कार्यों का सम्पादन प्रतिबंधित था बावजूद इसके वाहनों की खरीद कर ली गयी गयी. कैग ने इस पर गंभीर आपत्ति व्यक्त की है और सरकार से रिपोर्ट तलब की है पर सरकारी स्तर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका है.

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