रविवार, 30 अगस्त 2009

अधिकारी ऐसे खा रहे सरकारी माल

शमशाद
सिर्फ सहरसा में ही ऐसी अनियमितता नहीं है. मधुबनी के रहिका प्रखण्ड कार्यालय के अभिलेखों को खंगालने से भी सरकारी राशि के उलटफेर का मामला स्पष्टï हुआ है. सामान्य रोकड़ वही जो पूर्व के रोकड़पाल द्वारा अपने उततराधिकारी को सौंपा गया उसमें लम्बित, अग्रिम, 38.52 लाख रुपये, दिखाया गया था परंतु वास्तविक लंबित अग्रिम 34.18 लाख रुपये मात्र था. इस प्रकार अग्रिम के रूप में दिखाया गया 4.34 लाख रुपये की राशि फर्जी थे और उसका दुर्विनियोजन किया गया. इस कार्यालय में पूर्व के रोकड़पाल द्वारा चुनाव इत्यादि में खर्च करने के लिये 2.50 लाख रुपये का अग्रिम लिया गया पर इसका समायोजन नहीं किया गया.अप्रविष्टï प्रमाणक का दैनिक योग अप्रविष्टï प्रमाणक बही में 35.07 लाख रुपये के विरूद्घ कुल 37.52 लाख रुपये दिखाया गया था. इस प्रकार अप्रविष्टï प्रमाणक का जोड़ 2.45 लाख रुपये दिखा दिया गया. मधुबनी कोषागार से 2.37 लाख रुपये एवं 6.09 लाख रुपये की निकासी कर ली गयी पर इसे रोकड़ वहीं में चढ़ाया ही नहीं गया. इस प्रकार 8.82 लाख रुपये सरकारी खजाना से बाहर रह गया. प्रखण्ड विकास पदाधिकारी ने फरवरी 2008 की लेखा परीक्षा की टिप्पणी को तथ्यपरक बताते हुए गलती करने वाले अधिकारियों से वसूली की बात कहीं थी. पर बीडीओ ने गलती करने वाले अधिकारी के विरूद्घ की गई किसी कार्रवाई की सूचना बीडीओ रहिका द्वारा नहीं दिये जाने पर कैग ने आपत्ति जतायी है. तथा 18.11 लाख रुपये के दुर्विनियोजन को इंगित करते हुए सरकार से रिर्पोट तलब किया है जिससे संबंधित विभा में खलबली मच गई है.

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