सोमवार, 25 जनवरी 2010

राहत महसूस कर रहे विछुब्ध कांग्रेसी

पटना : कांग्रेस की सूची जारी होते ही राज्य कांग्रेस के बड़े नेताओं में खलबली मच गयी है. पुराने कद्दावर कांग्रेसी नेताओं ने राज्य संगठन प्रभारी जगदीश टाईटलर पर भी कमान तान दी है. उनका मानना है कि संगठन प्रभारी पार्टी बन गये हैं जबकि उन्हें न्यूट्रल रहना चाहिए था. विछुब्ध चल रहे कांग्रेसियों भी पूरी तरह मन बनाये हुए हैं. वे किसी कीमत पर काम्प्रमाईज के मूड में नहीं हैं.उन्होंने ने तो यहां तक कह डाला कि कितनों को टाईटलर पार्टी से निकालेंगे.इस प्रकार की लगातार बयानबाजी से पार्टी की साख को बट्टा लगता देख टाईटलर समझौते के मूड में हैं.उन्होंने विछुब्ध कांग्रेसियों की अब सुनने की बात की है. इससे विछुब्ध गुट के सदस्य राहत महसूस रहे हैं. उन्हें राहुल गांधी के बिहार दौरे का इंतेजार है. वे राहुल के सामने क्या करेंगे और कहेंगे इसे गुप्त रखा गया है.उधर टाईटलर और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा के बारे में कांग्रेस विधायक खुरर्शीद आलम की टिप्पणी के बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है. उनसे एक सप्ताह के अन्दर जवाब देने को कहा गया है.जवाब आने के बाद ही उनके भविष्य के बारे में आगे की रणनीति तय होगी. वैसे कायदे से देखा जाए तो अभी कांग्रेस तोडऩे से ज्यादा जोडऩे पर ध्यान लगाये हुए है इससे यह समझा जा रहा है कि विधायक खुर्शीद आलम के मामले में कांग्रेस बीच का रास्ता ही अपनायेगी.पर यह डिपेन्ड इस बात पर भी करता है कि वे नोटिस का जवाब कैसा देते हैं. पर उनका तेबर देखने से तो यही लगता है कि वे आर पार की लड़ाई के मूड में हैं. उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के स्पष्टीकरण पर उन्हे वकालतन नोटिस भेजा है जिसमें उन्हे मांसिक रूप से दिवालिया कहने पर एतराज व्यक्त किया है. कांग्रेस अभी पूरे बिहार में युवा कांग्रेस का सदस्यता अभियान चला रही है. ऐसे समय में पार्टी किसी विवाद में पडऩा नहीं चाहेगी.पहले ही कांग्रेस कार्यसमिति की सूची में मीरा कुमार के नाम के सामने उनकी जाति का उल्लेख कर पार्टी की पूरे देश में किरकिरी हो चुकी है. जिसके लिए कांग्रेस की राष्टï्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी तक को स्पष्टïीकरण देना पड़ा था साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा और संगठन प्रभारी जगदीश टाईटलर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.अब देखना यह है कि राहुल गांधी अपने बिहार दौरे के दौरान विछुब्ध गुट के नेताओं को समेटने में कामयाब होते है या विछुब्धों को बाहर का रास्ता दिखाते हैं.

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