जमालपुर विधानसभा क्षेत्र को लोजपा अपनी सूची में जोड़े हुए है, गत विधानसभा चुनाव में यहां से जदयुू के उम्मीदवार षैलेष कुमार जीते थे। वे कुर्मी जाति से हैं और अपने ही स्वजातीय राजद के उम्मीदवार उपेन्द्र प्रसाद वर्मा को मात दिया था। पर नये परिसीमन में इस विधानसभा क्षेत्र में राजपूत मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक हो गई है। इसलिए लोजपा यहां से किसी राजपूत नेता को टिकट देने का मन बना रही है जबकि जदयू षैलेष कुमार को उम्मीदवार बनायेगा।
इस विधानसभा क्षेत्र से राजद के उम्मीदवार उपेन्द्र प्रसाद षर्मा थे, पर पिछली दफा यादव मतदाताओं ने उन्हे मत न देकर जदयू उम्मीदवार षैलेष कुमार को समर्थन दे दिया था। इसके पीछे कारण पूर्व मंत्री जयप्रकाष नारायण यादव व उपेन्द्र प्रसाद वर्मा से यादव वोटरों की नाराजगी थी। इस बार भी कुल मिलकर स्थिति वैसी ही है पर उपेन्द्र प्रसाद वर्मा अब राजद छोड़ जदयू में जा चुके हंै । ऐसे में राजद के पास जमालपुर से लड़ने के लिए कोई कद्दावर नेता नहीं है जो इस सीट को निकाल सके। वैसे भी जयप्रकाष नारायण यादव की यादव मतदाताओं पर से पकड़ ढ़ीली पड़ गई है जबकि इस विधानसभा क्षेत्र में कुर्मी ,कोइरी मतदाताओं की संख्या कम हुई है। यही कारण है कि राजपूत जाति के उम्मीदवार जोर आजमाइष कर रहे हैं ,वैसे राजपुत उम्मीदवार हुआ तो,यादव ,पासवान, और मुसलमानों का समर्थन पाकर यहां लोजपा -राजद गठन्ंधन आसानी से जीत दर्ज करा सकता है। वैसे इस पर राजद भी अपना दावा ठोके हुए है पर मुंगेर और तारापुर विधानसभा सीट पर राजद का कब्जा है ऐसे में लोजपा जमालपुर सीट पर ही दावा ठोंक सकती है । इस विधानसभा क्षेत्र में लगभग बीस हजार पासवान मतदाता भी हेै । पूर्व में इस विधानसभा क्षेत्र से लोजपा ने यादव जाति की साधना देवी को दो बार चुनाव मैदान में उतारा था पर वे दोनो बार फाइट में भी नहीं आ सकी यही कारण है कि इस बार लोजपा यहां से उम्मीदवार बदल सकती है। राजपूत जाति के बीडीओ सिंह हाल में भाजपा से त्याग पत्र देकर लोजपा में षामिल हुए है और लोजपा की टिकट के लिए लाविंग भी कर रहे है । ऐसे में लोजपा राजद उम्मीदवार को कड़ी चुनौती पेष करने के लिए राजपूत जाति से उम्मीदवार उतार सकती है। इसके पीछे की गणित, राजपूत ,यादव, पासवान अैार मुसलमान मतदाताओं का ध्रुवीकरण कराकर किसी प्रकार सीट को निकल ले जाने की है। इस विधानसभा क्ष्ेात्र से अरविन्द कुमार राय, भी अपनी दावेदारी बनाये हुए हैं जबकि राजद यहां से चुनाव में उतरी तो नरेष सिंह यादव की मजबूत दावेदारी है। इनके अलावे युवा राजद के जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार यादव, मंटू यादव भी टिकट की दौर में हैं। कांग्रेस भी यहां से अपनी दावेदारी ठेंकेगी। कांग्रेस खेमे से तारकेष्वर यादव, प्रो.सुमन और सुषमा देवी के नामों की चर्चा है जबकि प्रदेष स्तर के एक कांग्रेसी नेता के भी यहां से चुनाव मैदान में कूदने की बात सरगर्मी से हो रही है।
उधर तारापुर विधानसभा सीट पर इस चुनाव में राजद की टिकट पर वहां के विधायक षकुनी चैधरी एक बार फिर से अपनी किस्मत आजमायेंगे जबकि उन्हें टक्कर के लिए जदयू खड़गपुर के विधायक अनन्त कुमार सत्यार्थी को उतार सकती है पर वे षकुनी चैधरी को कड़ी टक्कर देने में षायद ही सफल हो सकें क्योंकि उन्हें टिकट दिया गया तो जदयू की पुरानी लावी उनको हराने के लिए षकुनी चैधरी के पक्ष में गोलबन्द हो सकती है। वैसे भी इस क्षेत्र में कुषवाहा और यादव मतदाताओं के बीच छत्तीस का रिष्ता रहा है ऐसे में अनन्त सत्यार्थी जदयू के उम्मीदवार हुए तो उन्हें स्वजातीय होने कके नाते यादव मतदाताओं का तो समर्थन मिल सकता है पर वे कुषवाहा व कुर्मी मतदाताओं का मत प्राप्त करने में असफल रहेंगे। जिसका लाभ षकुनी चैधरी जिनकी पैठ सभी जाति वर्ग के मतदाताओं में है। यहां से जदयू की टिकट पर गत चुनाव में राजीव कुमार सिंह ने ष्षकुनी चैधरी को कड़ी टक्कर दी थी और मात्र छह सौ मतों से चुनाव हारे थे। इस बार भी यहां से अपनी दावेदारी ठोंके हुए हैं। कांग्रेस से जिला कांग्रेस अध्यक्ष अरूण कुमार यादव का टिकट इस बार लगभग तय माना जा रहा है और उनकी क्षेत्र में पकड़ का लाभ भी मिल सकता है क्योंकि खड़गपुर विधानसभा क्षेत्र से नये परिसीमन में यादव मतदाताओं की बड़ी संख्या तारापुर विधानसभा में जुड़ी है। ऐसे में देखना यह है कि तारापुर में सयासत के माहिर षकुनी चैधरी अपना किला बचा पाते हैं या नहीं।
गुरुवार, 19 अगस्त 2010
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